धार
धार भोजशाला विवाद : क्या इमारतें भी अपना स्वरूप बदल सकती हैं? हाईकोर्ट में मुस्लिम पक्ष ने उठाए एएसआई की निष्पक्षता पर सवाल
अधिवक्ता मेनन का तर्क; धार स्टेट ने भोजशाला को घोषित की थी मस्जिद, आज दोपहर बाद फिर सुनवाई
2003 के एएसआई के आदेश को 19 साल बाद 2022 में चुनौती देना कानूनन गलत
धार की ऐतिहासिक भोजशाला को लेकर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ में चल रही मैराथन सुनवाई अब एक निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। पिछले दो दिनों की सुनवाई के दौरान मुस्लिम पक्ष ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की भूमिका और कानूनी प्रक्रिया की वैधता पर कडे सवाल किए हैं। वरिष्ठ अधिवक्ता शोभा मेनन ने दलीलों के जरिए यह साबित करने की कोशिश की कि यह मामला जनहित का नहीं बल्कि मालिकाना हक यानि टाईटल सूट का है।
धार स्टेट ने घोषित की थी मस्जिद
मुस्लिम पक्ष इंटरवीनर काजी जकुल्ला और वेलफेयर सोसायटी ने अदालत के सामने 24 अगस्त 1935 का धार दरबार का एक ऐतिहासिक नोटिफिकेशन पेश किया। अधिवक्ता मेनन ने तर्क दिया कि:
उस समय के धार स्टेट ने स्पष्ट रूप से भोजशाला को मस्जिद घोषित किया था। ब्रिटिश शासन के दौरान भी इस अधिसूचना को मान्यता मिली थी, जिसे आज तक किसी भी अदालत में चुनौती नहीं दी गई है। मुस्लिम समुदाय यहां दशकों से नमाज पढ़ता आ रहा है और यह अधिकार उनसे छीना नहीं जा सकता।
कभी कहता है मंदिर, कभी कहता है मस्जिद : सुनवाई के दौरान एएसआई पर भी कई सवाल खडे किए गए, मुस्लिम पक्ष ने एएसआई के पुराने हलफनामों का हवाला देते हुए इसे असंगत और विरोधाभासी बताया। वरिष्ठ अधिवक्ता शोभा मेनन ने कोर्ट को बताया कि साल 1998 में एएसआई ने कहा था कि वह निश्चित तौर पर नहीं कह सकता कि यह मंदिर है या मस्जिद, लेकिन आज वह इसे मंदिर बता रहा है। भवन कोई जीवित वस्तु नहीं है जो समय के साथ अपना स्वरूप बदल ले। बिना ठोस सबूतों के किसी ढांचे की पहचान बदलना न्यायिक प्रक्रिया को गुमराह करने जैसा है।
2003 के एएसआई के आदेश को 19 साल बाद 2022 में चुनौती देना कानूनन गलत : मुस्लिम पक्ष ने वर्तमान याचिकाओं हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस और कुलदीप तिवारी की याचिकाएं की स्वीकार्यता पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं। उनका तर्क है कि 2003 के एएसआई के आदेश को 19 साल बाद 2022 में चुनौती देना कानूनन गलत है। चूंकि यह दो समुदायों के बीच संपत्ति के मालिकाना हक का विवाद है, इसलिए इसकी सुनवाई आर्टिकल 226 के तहत जनहित याचिका (पीआईएल) के रूप में नहीं, बल्कि सिविल कोर्ट में होनी चाहिए।
विभाग ने सर्वे की पूरी वीडियो फुटेज और डेटा एक सील्ड हार्ड ड्राइव में कोर्ट को सौंप दी है। साथ ही प्रतिवादी पक्ष को इसे सिस्टम पर देखने की सुविधा भी दी गई है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि भोजशाला में वाग्देवी की मूर्ति प्रतिष्ठित थी और यह मूलतः एक मंदिर है। हालांकि, मुस्लिम पक्ष का कहना है कि प्राण प्रतिष्ठा का कोई ऐतिहासिक साक्ष्य पेश नहीं किया गया है।
आज फिर दोपहर बाद सुनवाई
मंगलवार को शोभा मेनन की दलीलें पूरी हो गई हैं। अब बुधवार को मौलाना कमालुद्दीन वेलफेयर सोसायटी की ओर से पक्ष रखा जाएगा। वरिष्ठ वकील सलमान खुर्शीद भी पूर्व में इस मामले में दलीलें दे चुके हैं।
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झाबुआ जिला अस्पताल में धार की बहू ने बिना ऑपरेशन के दिया तीन बेटियों को जन्म
मां और तीनों बच्चों की सेहत में लगातार हो रहा सुधार, डॉक्टर बोले – ऐसे मामलों में ऑपरेशन का ही विकल्प
धार, झाबुआ। जिला चिकित्सालय में डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ की उत्कृष्ट सूझबूझ और कुशलता के चलते एक महिला ने बिना किसी जटिल ऑपरेशनके सामान्य प्रसव के जरिए एक साथ तीन स्वस्थ बेटियों को जन्म दिया। वर्तमान में मां और तीनों नवजात बच्चियां पूरी तरह सुरक्षित और स्वस्थ हैं।
ऐसे मामलों में ऑपरेशन का ही विकल्प : प्राप्त जानकारी के अनुसार धार जिले के ग्राम कुशलपुरा की निवासी श्रीमती रीना पति सुकराम जिनका मायका झाबुआ का गोपालपुरा है को प्रसव पीड़ा होने पर झाबुआ के जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। गर्भ में तीन बच्चे होने के कारण यह मामला बेहद संवेदनशील और जोखिम भरा था। आमतौर पर ऐसे मामलों में डॉक्टर सिजेरियन ऑपरेशन का ही विकल्प चुनते हैं, लेकिन यहाँ की मेडिकल टीम ने अपनी काबिलियत और धैर्य का परिचय देते हुए पूरी तरह सामान्य और सफल प्रसव कराया।
चिकित्सकों के अनुसार, जन्म लेने वाली तीनों बेटियों का वजन अलग-अलग है पहली बेटी: 1.2 किलोग्राम, दूसरी बेटी: 1.3 किलोग्राम, तीसरी बेटी: 1.8 किलोग्राम कम वजन होने के कारण पहली और दूसरी बच्ची को एहतियात के तौर पर एनआईसीयू शिशु गहन चिकित्सा इकाई में विशेष डॉक्टरों की देखरेख में रखा गया है। वहीं, 1.8 किलो वजन वाली तीसरी बेटी पूरी तरह सामान्य होकर वार्ड में अपनी मां के पास है। डॉक्टरों ने बताया कि चारों की सेहत में लगातार सुधार हो रहा है।
इस बेहद चुनौतीपूर्ण प्रसव को सफलतापूर्वक संपन्न कराने में झाबुआ जिला अस्पताल की स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रतिष्ठा चौहान, नर्सिंग ऑफिसर मंजू निनामा और हिमानी खतरकर सहित लेबर रूम के पूरे स्टाफ की मुख्य भूमिका रही।
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धामनोद में नर्मदा पुल से कूदकर आत्महत्या की कोशिश कर रहे अधेड़ को पुलिस ने बचाया
डायल-112 की एफआरवी गाड़ी सूचना मिलते की चंद मिनटों में पहुंची, परिजनों के सुपुर्द किया
धार। मध्य प्रदेश पुलिस की डायल-112 सेवा की तत्परता और सूझबूझ से एक व्यक्ति की जान बच गई। खलघाट स्थित नर्मदा नदी के बड़े पुल से छलांग लगाकर आत्महत्या का प्रयास कर रहे एक 45 वर्षीय अधेड़ को पुलिस स्टाफ ने ऐन वक्त पर पहुंचकर सुरक्षित बचा लिया।
क्या है पूरा मामला?
प्राप्त जानकारी के अनुसार 112 कंट्रोल रूम को एक आपातकालीन सूचना मिली थी। सूचना में बताया गया कि खलघाट स्थित नर्मदा ब्रिज पर एक व्यक्ति खड़ा है और नदी में कूदकर अपनी जान देने की कोशिश कर रहा है। सूचना मिलते ही डायल-112 की एफआरवी गाड़ी तत्काल मौके के लिए रवाना हुई। पुलिस कर्मियों ने बिना एक पल गंवाए घटना स्थल पर पहुंचकर तत्परता दिखाई और आत्महत्या का प्रयास कर रहे व्यक्ति को सूझबूझ से सुरक्षित पकड़ लिया।
परिजनों के सुपुर्द किया
पुलिस पूछताछ में व्यक्ति ने अपना नाम राकेश म्हाले निवासी ऊन जिला खरगोन बताया। डायल-112 स्टाफ व्यक्ति को सुरक्षित बचाकर धामनोद थाने लेकर आया, जहां पुलिस ने उसके परिजनों से संपर्क कर उन्हें थाने बुलाया। इसके बाद थाने में व्यक्ति की उचित काउंसलिंग की गई और उसे सकुशल उसके परिवार के सुपुर्द कर दिया गया। अपनों को सही-सलामत पाकर परिजनों ने पुलिस का आभार व्यक्त किया।
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बिखरौन में नवविवाहिता की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत
जहर खाकर सुसाइड की आशंका, 1 महीने पहले ही हुई थी शादी
धार। ग्राम बिखरौन में एक नवविवाहिता की जहरीला पदार्थ के सेवन से मौत हो गई। धामनोद पुलिस ने मर्ग कायम कर मामले की जांच शुरू कर दी है। जानकारी के अनुसार, बिखरौन निवासी मीनाक्षी की शादी लगभग एक महीने पहले मनावर निवासी संजय निगवाल से हुआ था। शादी के बाद मीनाक्षी अपने मायके बिखरौन आई हुई थी।
मंगलवार को अज्ञात कारणों से मीनाक्षी ने जहरीले पदार्थ का सेवन कर लिया। तबीयत बिगड़ने पर परिजन उसे तत्काल धामनोद के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले गए। प्राथमिक इलाज के बाद डॉक्टरों ने मीनाक्षी की गंभीर हालत को देखते हुए उसे जिला अस्पताल धार रेफर कर दिया। हालांकि, जिला अस्पताल ले जाते समय रास्ते में ही उसने दम तोड़ दिया। इसके बाद परिजन शव लेकर वापस सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र धामनोद पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
अस्पताल प्रबंधन ने तुरंत धामनोद पुलिस को घटना की सूचना दी। सूचना मिलने पर धामनोद थाना पुलिस मौके पर पहुंची और मर्ग कायम कर जांच शुरू की। बुधवार को पैनल द्वारा पोस्टमार्टम कराने के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया। शादी के एक माह बाद नवविवाहिता की संदिग्ध मौत से परिवार सदमे में है। फिलहाल मौत के कारणों का खुलासा नहीं हो सका है। धामनोद पुलिस सभी पहलुओं से मामले की जांच कर रही है और मौत के सही कारणों का पता लगाने का प्रयास कर रही है।
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