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धार

डकैती की योजना बनाते 3 बदमाश गिरफ्तार….. वाहनों को रोककर डकैती डालने की बना रहे थे योजना

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– दो आरोपी मौके से हुए फरार, पुलिस ने देसी कट्टा, कारतूस, धारदार हथियार बरामद किया

धार। बाग पुलिस ने ग्राम अंजनताड़ के पास डकैती की योजना बना रहे तीन हथियारबंद बदमाशों को गिरफ्तार किया है, जबकि दो आरोपी अंधेरे का फायदा उठाकर भागने में सफल रहे। पुलिस ने इनके पास से देसी कट्टा, कारतूस, धारदार हथियार और इंदौर से चोरी की गई एक मोटरसाइकिल जब्त की है।

17 जुलाई 2026 की रात करीब 12 बजे बाग पुलिस और डेहरी चौकी पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली कि खोजा फाटा ग्राम अंजनताड़ के पास कुछ हथियारबंद बदमाश वाहनों को रोककर डकैती डालने की योजना बना रहे हैं। सूचना मिलते ही पुलिस टीम ने तुरंत मौके पर पहुंचकर घेराबंदी की।

तीन आरोपी दबोचे, दो फरार
पुलिस ने मौके से तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। पकड़े गए आरोपियों की पहचान दिलीप पिता प्रेम सिंह पवार निवासी बोरडबरा, जितेंद्र पिता गुलाब सपनिया निवासी खेडलीहनुमान गंधवानी और लोकेश पिता रकसिंह निवासी बोरडबरा के रूप में हुई है। वहीं, दो अन्य आरोपी अंधेरे का फायदा उठाकर फरार हो गए, जिनकी तलाश में पुलिस दबिश दे रही है।

चोरी की बाइक और हथियार बरामद
गिरफ्तार आरोपियों के कब्जे से पुलिस ने एक 12 बोर का देसी कट्टा, एक जिंदा कारतूस, एक फालिया, डंडे और इंदौर के भंवरकुआं क्षेत्र से चोरी की गई एक मोटरसाइकिल बरामद की है। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पकड़े गए आरोपियों में से लोकेश पुराना अपराधी है। उसके खिलाफ पहले से चोरी और अवैध शराब तस्करी के मामले दर्ज हैं

इस टीम को मिली सफलता
इस कार्रवाई में बाग थाना प्रभारी निरीक्षक हीरू रावत, डेहरी चौकी प्रभारी उपनिरीक्षक भूपेंद्र खरतिया, एएसआई गोरेलाल शुक्ला, प्रधान आरक्षक बाबू कामलियार, सोहन, भावसिंह, आरक्षक ओमप्रकाश, सुनील, प्रीतम, सोनू, रवीन्द्र, राजू और धार साइबर टीम की सराहनीय भूमिका रही।

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भोजशाला : चालीस पीर का स्थान अंतिम आदेश तक नमाज के लिए तय, समाज को आपत्ति

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सदर अब्दुल समद बोले – स्थान दो किलो मीटर दूर, हम सुप्रीम कोर्ट में फ‍िर बात रखेंगे

5 अगस्त को मामले की अंतिम और निर्णायक सुनवाई, अंतरराष्ट्रीय हिंदू परिषद ने निकाली चलों भोजशाला यात्रा

लखन टांंक…..धार। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद जिला प्रशासन ने जुम्मे की नमाज के लिए चालीस पीर दरगाह के पास स्थान तय किया हैं, कोर्ट के प्रकरण में अंतिम आदेश आने तक यहां पर प्रति शुक्रवार मुस्लिम समाज दोपहर दो घंटे यहां पर नमाज पढ़ सकेगा। इसके लिए जिला प्रशासन की एक हाई-लैवल बैठक कलेक्टर राजीव रंजन मीणा व एसपी सचिन शर्मा द्वारा ली गई। बैठक में राजस्व विभाग द्वारा स्थान चयन को लेकर सौंपी गई रिपोर्ट पर चर्चा हुई। जिसके बाद मुस्लिम समाज के लोगों को निर्णय से अवगत करवाया गया। हालांकि मुस्लिम समाज को इस नए स्थान से आपत्ति है। मुस्लिम समाज के सदर अब्दुल समद के अनुसार यह स्थान शहर से दो किलोमीटर दूर हैं, जबकि सर्वोच्च न्यायालय के आदेश में स्पष्ट लिखा हैं, कि भोजशाला से सटा हुआ खुला स्थान नमाज के लिए उपयुक्त होगा। ऐसे में अब मुस्लिम समाज अपनी बात कोर्ट के समक्ष रखेगा। इधर तय हुए स्थान पर नमाज के लिए तैयारी जिला प्रशासन ने शुरु कर दी है। राजस्व विभाग, पुलिस व नपा की एक संयुक्ते टीम चालीस पीर दरगाह परिसर पहुंची, यहां पर पास में ही एक एकड जमीन को नमाज के लिए चयनित किया गया है। प्रशासन ने बैरिकेड लगाने के साथ सफॉई भी यहां पर करवा दी है।

दरअसल मुस्लिम पक्ष की और से हाईकोर्ट द्वारा दिए गए निर्णय के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में आवेदन किया गया था, तीन दिन पहल 14 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने भोजशाला परिसर से सटे हुए स्थान पर नमाज के लिए स्थान देने के आदेश सरकार को दिए थे। जिला प्रशासन को कोर्ट का ऑर्डर प्राप्त हुआ, जिसके बाद कानूनी राय ली व नए स्थान तय किया। प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में मुस्लिम समाज की बैठक हुई, समाज को नए स्थान की जानकारी दी गई। चूंकि जुम्मे की नमाज में सैकड़ों की संख्या में समाज के लोग शामिल होते हैं, इसलिए उनकी सुरक्षा, सुगम आवाजाही और यातायात व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने ग्राम मालीवाड़ा की सर्वे क्रमांक 664 स्थित ‘चालीसा पीर दरगाह’ के पास की खाली भूमि को नमाज के लिए चिह्नित किया। बैठक के बाद प्रशासन ने इस चयनित स्थान की जानकारी आधिकारिक रूप से सार्वजनिक कर दी है। इसके बाद ही समाज ने चालीस पीर के स्थान को लेकर आपत्ति दर्ज करा दी है। देर शाम को नमाज के लिए चयनित स्‍थान को जायजा लेने के लिए कलेक्‍टर राजीव रंजन मीना और पुलिस अधीक्षक सचिन शर्मा भी चालीस पीर पहुंचे और जगह का मुआयना कर इंतज़ामों का जायज़ा लिया।

दूर नहीं पढेंगे नमाज
अब्दुल समद मौलाना कमालुद्दीन वेलफेयर सोसाइटी ने बताया कि प्रशासन ने सभी को बुलाया था, उन्होंने अपना पक्ष रखा व हमसे भी कुछ सुझाव मांगे थे। चूँकि सर्वोच्च न्यायालय ने आर्डर में स्पष्ट शब्दों में लिखा है कि प्रि‍माइसेस से सटी हुई जगह पर नमाज़ के लिए स्थान दिया जाए। लेकिन कहीं न कहीं एडमिनिस्ट्रेशन ने हमारे साथ फिर से धोखाधड़ी की है और हमें तीन घंटे बैठकार रखा। बताया गया कि 2 किमी दूर चालीस पीर दरगाह के पास नमाज पढे। हमारा कहना साफ़ है कि जो आदेश है,आप उसका पालन कराइए। लेकिन आप तो बिल्कुल आदेश के खिलाफ ही चले गए हैं, तो उसको हम माननीय सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष फिर से पेश करेंगे आदेश का और हमारी भावनाओं को आहत किया गया है और हमने उसपे आपत्ति दर्ज करा दी है। अब हम हमारी आपत्ति सुप्रीम कोर्ट के समक्ष रखेंगे।

300 मीटर का क्षेत्र आरक्षित
ऑर्डर की कॉपी प्राप्त होने के बाद हिंदू समाज का प्रतिनिधि मंडल कलेक्टर से मिला। हिंदू पक्ष के प्रतिनिधि गोपाल शर्मा ने चर्चा में बताया कि हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट दोनों ने ही अपने आदेशों में स्पष्ट कर दिया है कि भोजशाला मां सरस्वती का मंदिर है। कोर्ट के रुख से साफ है कि भोजशाला में नमाज़ की अनुमति नहीं है। उन्होंने तर्क दिया कि सुप्रीम कोर्ट ने भोजशाला परिसर के निकट ओपन स्थान पर नमाज़ की बात कही है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के नियमों के अनुसार, भोजशाला का 100 मीटर का क्षेत्र संरक्षित और 200 से 300 मीटर का क्षेत्र आरक्षित है। हिंदू पक्ष ने इतिहास का हवाला देते हुए दावा किया कि साल 1935 में भोजशाला के पास जो नमाज़ शुरू हुई थी, उसके समाधान के रूप में साल 1942 में धार के तत्कालीन राजा ने बख्तावर मार्ग पर रहमत मस्जिद बनाकर दे दी थी। इसलिए नमाज़ के लिए उस मस्जिद का उपयोग किया जाना चाहिए। हिंदू पक्ष ने कलेक्टर से मांग की है कि शहर की शांति और सद्भाव बनाए रखने के लिए प्रशासन सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन करते हुए नमाज़ की व्यवस्था को भोजशाला के 300 मीटर के दायरे से बाहर ही रखे।

हनुमान चालीसा का हुआ पाठ
अंतरराष्ट्रीय हिंदू परिषद के द्वारा शहर में शु्क्रवार को भोजशाला चलो यात्रा निकाली गई। परिषद के आव्हान पर नगर के सभी हिंदू किला मैदान परिसर पर एकत्रित हुए, जहां से हाथों में केसरिया झंडे लिए पैदल ही जय श्री राम के नारे लगाते हुए हिंदू वीर भोजशाला पहुंचे। इस दौरान शहर के प्रमुख मार्गों पर यात्रा का स्वागत किया गया। यात्रा के बाद भोजशाला परिसर में मां वाग्देवी के तेल चित्र के समक्ष सामूहिक हनुमान चालीसा का पाठ हुआ व अंत में महाआरती करते हुए यात्रा का समापन किया गया। इस दौरान यात्रा में महिलाएं, युवतियां व बुजूर्ग सहित युवा बडी संख्याी में शामिल हुए।

5 अगस्त को होगी अंतिम सुनवाई
भोजशाला पर 14 जुलाई को दी गए सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अब याचिकाकर्ताओं जिब्राण अंसारी, हाजी मुनीर अहमद व अन्य की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता हुज़ेफ़ा अहमदी, डॉ. अभिषेक मनु सिंघवी, सलमान खुर्शीद और मीनाक्षी अरोड़ा ने पक्ष रखा। वहीं प्रतिवादियों की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और एडिशनल सॉलिसिटर जनरल के.एम. नटराज उपस्थित हुए। सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाओं को औपचारिक रूप से स्वीकार करते हुए मामले की अंतिम सुनवाई के लिए 5 अगस्त 2026 की तारीख तय की है। इस सुनवाई के लिए मुख्य न्यायाधीश एक विशेष पीठ का गठन करेंगे। अदालत की सुचारू सहायता के लिए अधिवक्ता फुजैल अहमद अय्यूबी और आदित्य शर्मा को क्रमशः याचिकाकर्ता और प्रतिवादी पक्ष की ओर से नोडल काउंसिल’ नियुक्त किया गया है, जो सभी आवश्यक कानूनी दस्तावेजों का एकत्र करेंगे।

इनका कहना हैं, कि
राजस्व अधिकारियों से रिपोर्ट ली गई और दोनों पक्षों के साथ चर्चा की गई। इसके बाद ग्राम मालीवाड़ा की सर्वे क्रमांक 664 स्थित खाली भूमि को नमाज के लिए चिन्हित किया गया है, जो 40 पीर के बगल में स्थित है। कोर्ट का अंतिम निर्णय आने तक मुस्लिम पक्ष के लोग प्रत्येक शुक्रवार नमाज पढ़ सकेंगे।
संजीव केशव पांडे, एडीएम, धार

सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट आदेश दिया कि भोजशाला से सटे हुए उपयुक्त स्थान पर नमाज के लिए जगह दी जाए। किंतु प्रशासन दो किलो मीटर दूर पढने के लिए कह रहा है। हमारी आपत्ति अधिकारियों के समक्ष दर्ज करवा दी हैं, अब कोर्ट के समक्ष हमारी बात रखेंगे।
अब्दुल समद, सदर, धार

12 मई 2026 को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने सभी पक्षों की लंबी बहस और एएसआई सर्वेक्षण रिपोर्ट पर सुनवाई की, दो घंटे चली बहस चली सुनवाई में सभी पक्षों ने अपने तर्क रखे। मामले में कोर्ट ने फैसला रिजर्व फॉर ऑर्डर रखा है।

15 मई 2026: हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला देते हुए भोजशाला को माता सरस्वती का मंदिर माना भोजशाला मामले में इंदौर हाई कोर्ट ने बड़ा फैसला दिया है. …। इस आदेश के तहत हिंदुओं को भोजशाला में नियमित पूजा करने का अधिकार मिलाऔर मुस्लिम पक्ष के अंदर नमाज पढ़ने पर प्रतिबंध लगा दिया गया।

14 जुलाई 2026: हाईकोर्ट के फैसले को मुस्लिम पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। सर्वोच्च अदालत ने एक अंतरिम व्यवस्था दी, जिसके अनुसार हर शुक्रवार दोपहर 1 बजे से 3 बजे के बीच नमाज के लिए परिसर के निकट ही एक खुली वैकल्पिक जगह उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है।

17 जुलाई 2026 : सुप्रीम कोर्ट के आदेश के क्रियान्वयन के बाद प्रशासन द्वारा व्यवस्था की गई और चालीस पीर स्थित ग्राम मालीवाड़ा की सर्वे क्रमांक 664 स्थित चालीसा पीर दरगाह के पास की खाली भूमि को नमाज के लिए चिह्नित किया।

निर्णय की और मामला : सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाओं को औपचारिक रूप से स्वीकार करते हुए मामले की अंतिम सुनवाई के लिए 5 अगस्त 2026 की तारीख तय की है। इस सुनवाई के लिए मुख्य न्यायाधीश एक विशेष पीठ का गठन किया गया है।

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टांडा पुलिस ने दबोचा 10 हजार का इनामी लुटेरा, 2021 से चल रहा था फरार

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गिरफ्तारी से बचने के लिए लंबे समय से फरार था आरोपी

धार। टांडा पुलिस ने साल 2021 से लूट के मामले में फरार चल रहे दस रुपये के इनामी आरोपी ठाकुर पिता हरु निवासी ग्राम सिंगाचोरी को गिरफ्तार कर लिया है। जानकारी के अनुसार, थाना टांडा में वर्ष 2021 में आरोपी ठाकुर के खिलाफ लूट का मामला दर्ज किया गया था। वारदात के बाद से ही आरोपी लगातार अपनी गिरफ्तारी से बचने के लिए फरार चल रहा था। लंबे समय तक सुराग न मिलने पर पुलिस अधीक्षक द्वारा आरोपी की गिरफ्तारी पर दस हजार रुपये के नकद इनाम की घोषणा की गई थी।

विशेष अभियान के तहत मिली सफलता
फरार और इनामी अपराधियों की धरपकड़ के लिए वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के निर्देशन में एक विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसी कड़ी में टांडा थाना पुलिस लगातार आरोपी की तलाश में जुटी थी। पुलिस को मुखबिर से सटीक सूचना और तकनीकी साक्ष्य मिले, जिसके आधार पर पुलिस टीम ने घेराबंदी की और आरोपी ठाकुर को धर दबोचा।

न्यायालय में किया जा रहा पेश
पुलिस ने बताया कि गिरफ्तार किए गए इनामी आरोपी के खिलाफ आवश्यक वैधानिक कागजी कार्रवाई पूरी कर ली गई है। आरोपी को न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया जा रहा है। उक्त कार्यवाही में थाना टांडा पुलिस की टीम की महत्वपूर्ण एवं सराहनीय भूमिका रही।

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भोजशाला : ऑर्डर की कॉपी का इंतजार, इसके बाद होगा नमाज के स्‍थान पर निर्णय

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परिसर से सटे खुले स्थान पर नमाज की हो सकती व्यवस्था, मौसम खुला रहा तो बसंत पंचमी की तरह पढ़ी जाएगी नमाज

सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम की तैयारी, 350 का अतिरिक्त पुलिस लगेगा

धार की भोजशाला परिसर से लगे खुले स्थान पर नमाज की व्यवस्था करने को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम व्यवस्थाो की थी, किंतु कोर्ट के इस आदेश की कॉपी अभी तक अपलोड नहीं हो पाई है। ऐसे में कल 17 जुलाई को दोपहर में जुम्मे की नमाज भोजशाला के नजदीक होगी या नही इसको लेकर अभी तक संशय बना हुआ है। मुस्लिम समाज से लेकर जिला प्रशासन कोर्ट के आदेश की कॉपी का इंतजार कर रहा है। कॉपी मिलते ही प्रशासन कानूनी जानकारों से चर्चा करेगा, इसके बाद एएसआई व जिला प्रशासन की एक बैठक होगी। जिसके बाद आगामी निर्णय निर्णय लिया जाएगा। सदर अब्दुल समद के अनुसार आदेश की कॉपी अपलोड नहीं हुई हैं, जिसका इंतजार किया जा रहा है। वैसे भी यह आदेश कोर्ट ने अभी अंतरिम आदेश दिया है। यह अंतिम फैसला नहीं है, समाज की और से अभिभाषक आगामी तारीखों पर अपना पक्ष रखेंगे।

यह हुआ था कोर्ट में
ऐतिहासिक भोजशाला परिसर से सटे हुए खुले स्थान पर मुस्लिम समाज नमाज पढ सकेगा। यह आदेश हर शुक्रवार दोपहर 1 से 3 बजे के बीच होने वाले नमाज के लिए है। मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को 14 जुलाई को सुनवाई हुई, कोर्ट ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण से यह भी कहा कि बिना कोर्ट की मंजूरी परिसर में किसी भी तरह का बदलाव न करें। सुप्रीम कोर्ट ने भोजशाला-कमाल मौला परिसर को लेकर मुस्लिम पक्षों की याचिकाओं पर नोटिस जारी किया है। इन याचिकाओं में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी गई है, जिसमें भोजशाला को मां सरस्वती का मंदिर माना गया था और परिसर में नमाज अदा करने पर रोक लगा दी गई थी। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहन की पीठ ने मामले की सुनवाई की। हालांकि, कोर्ट ने फिलहाल अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया। यानी पहले जैसी व्यवस्था बहाल नहीं होगी, जिसके तहत शुक्रवार को मुस्लिम समुदाय को नमाज और निर्धारित दिनों में हिंदू पक्ष को पूजा की अनुमति थी। सुप्रीम कोर्ट ने मामले में सभी पक्षों से जवाब मांगा है। अब इस विवाद पर आगे की सुनवाई बाद में होगी।

हाईकोर्ट ने ये दिया था आदेश
दरअसल 15 मई 2026 को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने अपने फैसले में भोजशाला-कमाल मौला परिसर को मां सरस्वती का मंदिर माना था। अदालत ने परिसर में नमाज अदा करने पर रोक लगाते हुए हिंदू पक्ष को पूजा-अर्चना का अधिकार दिया था। हाईकोर्ट का यह फैसला भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की सर्वे रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों के आधार पर सुनाया गया था। हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ मुस्लिम पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। अब सर्वोच्च अदालत सभी पक्षों की दलीलें, एएसआई रिपोर्ट, ऐतिहासिक अभिलेख और कानूनी पहलुओं का परीक्षण करेगी। केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि हाईकोर्ट के फैसले के बाद प्रशासन ने पूरे मामले को शांतिपूर्ण ढंग से संभाला है। उन्होंने कहा कि आदेश लागू होने के बाद क्षेत्र में किसी भी प्रकार की कानून-व्यवस्था संबंधी समस्या सामने नहीं आई और प्रशासन ने सामाजिक सौहार्द बनाए रखा है। सुनवाई के बाद भोजशाला संयोजक गोपाल शर्मा ने कहा कि हाई कोर्ट के आदेश के अनुसार भोजशाला में नियमित पूजा-अर्चना जारी रहेगी। वहीं, तय जगह पर मुस्लिम समुदाय के लोग नमाज अदा कर सकेंगे।

शहर में बढी सुरक्षा
जुम्में की नमाज को लेकर प्रशासन अलर्ट हैं, एसपी सचिन शर्मा के निर्देशन में शहर में अतिरिक्ता पुलिसबल तैनात करने की तैयारी है। हालांकि जिला प्रशासन भी ऑर्डर की कॉपी का इंतजार कर रहा हैं, इधर पुलिसबल जरुर अलर्ट है। प्रशासन की तैयारियों के अनुसार देर रात तक भी आदेश को लेकर कोई जानकारी आती हैं, तो नगर के प्रमुख मार्गों पर सुबह से ही पुलिस रहेगी। भोजशाला के पहुंचकर मार्ग पर लगातार पुलिसबल भ्रमण करेगी। भोजशाला के 100 मीटर दायरे पर थ्री लेयर सुरक्षा रहेगी। टीआई, डीएसपी व एसडीओपी सहित करीब 350 का पुलिसबल सुरक्षा के चलते मौजूद रहेगा।

प्रशासन की परीक्षा
सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश का पालन करवाने की सबसे बडी जिम्मेपदारी जिला प्रशासन की है। प्रशासन को सबसे पहले जुमे की नमाज पढाने के लिए वैकल्पिक स्थान तय करना होगा, जो न्यायालय की भावना और सुरक्षा मानकों के अनुरुप हो। इसके साथ ही पूजा और नमाज के लिए आने वाले लोगों के लिए अलग-अलग प्रवेश एवं निकासी मार्ग तय करना, सुरक्षा घेरा बनाना, भीड नियंत्रण करने जैसे महत्ववपूर्ण तैयारी करनी होगी। कल 17 जुलाई को प्रशासन की परीक्षा का दिन होगा। इधर बारिश का मौसम होने से नमाज को किसी खुले स्थान पर करवाने में दिक्कसत आएगी। ऐसे में नमाजियों के लिए अस्थाहई टैंट की व्यवस्थास करनी होगी।

बसंत पंचमी की व्यवस्था बनेगी मॉडल
दरअसल साल के पहले माह जनवरी में भी सुप्रीम कोर्ट ने इसी प्रकार की व्यवस्थाथ करने के निर्देश दिए थे। दिनांक 22 जनवरी 2026 को बसंत पंचमी के अवसर पर प्रशासन ने दोनों समाज की धार्मिक भावनाओं को ध्यान में रखते हुए निर्णय लेते हुए अलग-अलग व्यवस्था की थी। उस दिन हिंदू समाज ने सूर्योदय से सूर्यास्त तक भोजशाला में अखंड पूजा-अर्चना की थी, जबकि मुस्लिम समाज के लिए बाहरी क्षेत्र में वैकल्पिक स्थान पर नमाज की प्रशासन व्यवस्था की गई थी। दोनों समुदायों के आने-जाने के रास्ते भी अलग रखे गए थे। प्रशासन उस समय पूरे. आयोजन को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने में सफल रहा था। शहर में कोई अप्रिय घटना नहीं हुई थी, ऐसे में इस मर्तबा उसी मॉडल को आधार बनाया जा सकता है।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश का स्वागत है। हिंदू समाज को भोजशाला परिसर में पूजा का अधिकार यथावत मिला है। नमाज को लेकर हमारा कोई विरोध नहीं है। भोजशाला के 100 मीटर संरक्षित और 300 मीटर आरक्षित क्षेत्र से बाहर कहीं भी नमाज हो, हमें कोई आपत्ति नहीं है। अलग से व्यवस्था करना प्रशासन की जिम्मेसदारी हैं, हमारी पूजा मंदिर में ही होगी।

  • गोपाल शर्मा, संयोजक, भोज उत्सव समिति

कमाल मौला मस्जिद में मुस्लिम समाज कई वर्षों से जुमे से की नमाज अदा करता आया है। कुछ दिन पूर्व व्यवस्था बंद हो गई थी, जिसके खिलाफ हमने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दायर की थी। कोर्ट ने अभी अंतरिम आदेश दिया है। यह अंतिम फैसला नहीं है, अब प्रशासन को नमाज पढवाने की उचित व्यवस्था करना है।

  • जुल्फिकार पठान, सदर, नमाज इंतजामिया कमेटी
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