धार, झाबुआ, अलीराजपुर, खरगोन, बड़वानी, खंडवा और बुरहानपुर की जिम्मेदारी दीपक डुंडीर सौंपी
धार। मध्य प्रदेश में करीब नौ साल बाद छात्रसंघ चुनाव की प्रक्रिया फिर से शुरू होने जा रही है। जबलपुर हाईकोर्ट के निर्देश के बाद राज्य सरकार ने 2026-27 के अकादमिक कैलेंडर में सितंबर 2026 में सभी कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में छात्रसंघ चुनाव कराने का प्रावधान किया है, लेकिन अभी यह तय नहीं हुआ है कि चुनाव प्रत्यक्ष होंगे या अप्रत्यक्ष
जबलपुर हाईकोर्ट ने 3 अगस्त 2026 को स्पष्ट कर दिया कि मध्य प्रदेश में सितंबर 2026 में ही छात्रसंघ चुनाव कराए जाएंगे। कोर्ट ने कहा कि चुनाव लोकतांत्रिक तरीके से होंगे और जरूरत पड़ने पर शांतिपूर्ण चुनाव के लिए पुलिस-प्रशासनिक सहयोग सुनिश्चित किया जाएगा।सरकार ने अदालत में 2026-27 का शैक्षणिक कैलेंडर पेश किया, जिसमें सितंबर में छात्र संघ गठन की प्रक्रिया शामिल है। हालांकि, चुनाव प्रत्यक्ष होंगे या अप्रत्यक्ष, इसका अंतिम फैसला मुख्यमंत्री मोहन यादव द्वारा लिया जाएगा।
कांग्रेस की संगठनात्मक तैयारी
चुनाव से पहले कांग्रेस ने संगठनात्मक तैयारी शुरू कर दी है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी के निर्देश पर पार्टी ने प्रदेश को 13 क्षेत्रों में बांटकर छात्रसंघ चुनाव के लिए प्रभारियों की नियुक्ति की है।इन प्रभारियों को छात्र संगठनों से समन्वय करने और एनएसयूआई समर्थित उम्मीदवारों की तैयारी कराने की जिम्मेदारी दी गई है। क्षेत्रवार जिम्मेदारियों में शामिल हैं धार, झाबुआ, अलीराजपुर, खरगोन, बड़वानी, खंडवा और बुरहानपुर की जिम्मेदारी दीपक डुंडीर सौंपी गई है अन्य क्षेत्रों के लिए भी अलग-अलग प्रभारी नियुक्त किए गए हैं।
एनएसयूआई की प्रत्यक्ष चुनाव की मांग
एनएसयूआई ने प्रत्यक्ष चुनाव की मांग को लेकर प्रदेशव्यापी आंदोलन की चेतावनी दी है। प्रदेश अध्यक्ष आशुतोष चौकसे ने कहा कि संगठन लगातार छात्रसंघ चुनाव की बहाली के लिए संघर्ष कर रहा था, जो राज्य में करीब नौ साल से लंबित थे। उन्होंने स्पष्ट किया कि हाईकोर्ट ने भी निर्देश दिए हैं कि चुनाव लोकतांत्रिक तरीके से हों। एनएसयूआई का कहना है कि हर विद्यार्थी को सीधे अपने छात्रसंघ पदाधिकारी चुनने का अधिकार मिलना चाहिए। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि प्रत्यक्ष चुनाव नहीं कराए गए तो वे प्रदेशव्यापी आंदोलन करेंगे।
